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भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा अपडेट, DGP बोले- साक्ष्यों के आधार पर हुई STF जवान की गिरफ्तारी

 


भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा अपडेट, DGP बोले- साक्ष्यों के आधार पर हुई STF जवान की गिरफ्तारी

पटना: बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले की जांच के दौरान बिहार पुलिस ने स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के एक जवान को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गिरफ्तारी उपलब्ध साक्ष्यों (Evidence) के आधार पर की गई है और जांच अभी जारी है।

पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान डीजीपी ने कहा कि पुलिस किसी भी मामले में बिना साक्ष्य के कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्हीं के आधार पर यह कदम उठाया गया है। यदि आगे जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

क्या बोले DGP विनय कुमार?

डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि इस मामले में दो स्तर पर जांच चल रही है।

  • पुलिस द्वारा आपराधिक अनुसंधान (Investigation)
  • न्यायिक जांच (Judicial Inquiry)

उन्होंने कहा कि दोनों प्रक्रियाएं स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ रही हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। इसलिए फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

क्या है पूरा मामला?

17 जून 2026 को बिहार के भोजपुर जिले के बिलौती गांव में पुलिस और STF की कार्रवाई के दौरान 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी। पुलिस का दावा था कि कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई, जबकि परिवार और स्थानीय लोगों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताया। घटना के वीडियो और अलग-अलग दावों के सामने आने के बाद मामला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया।

विवाद बढ़ने पर बिहार सरकार ने एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई और अब STF के एक जवान की गिरफ्तारी इस मामले की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

क्यों अहम है STF जवान की गिरफ्तारी?

किसी चर्चित पुलिस एनकाउंटर मामले में जांच के दौरान STF के जवान की गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों की गंभीरता से जांच कर रही हैं। हालांकि गिरफ्तारी का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगा।

आगे क्या होगा?

अब इस मामले में पुलिस अनुसंधान और न्यायिक जांच दोनों की रिपोर्ट का इंतजार है। यदि जांच में अन्य अधिकारियों या कर्मियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। डीजीपी ने भी संकेत दिया है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।

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