छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ा विवाद, CSEB मुख्यालय का घेराव; कांग्रेस ने भी किया समर्थन
रायपुर | छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार को राजधानी रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSEB) मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर घेराव किया। इस आंदोलन को कांग्रेस का भी समर्थन मिला। डडसेना भवन में आयोजित सभा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय सहित कई कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनकी मांगों का समर्थन किया।
स्मार्ट मीटर को लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है?
प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने की प्रक्रिया तेज होने के साथ ही इसका विरोध भी बढ़ने लगा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले रोजगार, भुगतान और कर्मचारियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि कई जगहों पर मानदेय का भुगतान लंबित है और भुगतान व्यवस्था में भी एकरूपता नहीं है।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का कहना है कि स्मार्ट मीटर बिजली व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इन मीटरों के जरिए बिजली की खपत का डेटा सीधे बिजली कंपनी तक पहुंचता है, जिससे बिलिंग प्रक्रिया अधिक सटीक होती है, बिजली चोरी पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है और उपभोक्ताओं को अपनी खपत की जानकारी रियल-टाइम में मिल सकती है।
हालांकि, देश के कई राज्यों में स्मार्ट मीटर लागू होने के दौरान बिलिंग, तकनीकी समस्याओं और रोजगार पर प्रभाव को लेकर सवाल उठ चुके हैं। छत्तीसगढ़ में भी अब यही मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
लंबित भुगतान जल्द जारी किया जाए।
पूरे प्रदेश में समान भुगतान व्यवस्था लागू हो।
नई व्यवस्था से प्रभावित कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए।
सरकार और बिजली विभाग के साथ जल्द वार्ता की जाए।
स्मार्ट मीटर लागू करने से पहले स्पष्ट पुनर्वास और रोजगार नीति बनाई जाए।
कांग्रेस ने क्या कहा?
प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेताओं ने कहा कि तकनीकी बदलाव का विरोध नहीं है, लेकिन इसके कारण यदि हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होती है तो सरकार को पहले उनका समाधान प्रस्तुत करना चाहिए। उनका कहना है कि विकास और रोजगार—दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
आगे क्या?
प्रदर्शनकारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। दूसरी ओर सरकार स्मार्ट मीटर परियोजना को बिजली सुधार कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे मुद्दे की दिशा तय कर सकती है।


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