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केन-बेतवा परियोजना पर बढ़ा विवाद: पुलिस ने हटाया आदिवासियों का धरना, 14 दिन से अनशन पर बैठे अमित भटनागर अस्पताल में भर्ती

छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन रविवार को अचानक नया मोड़ ले गया। कई दिनों से धरने पर बैठे आदिवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से हटा दिया। इस दौरान 14 दिनों से आमरण अनशन कर रहे आंदोलनकारी अमित भटनागर की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा था। ऐसे में प्रदर्शन स्थल पर लोगों की सुरक्षा को देखते हुए कार्रवाई करना जरूरी हो गया। वहीं आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि उन्हें बिना सहमति के जबरन हटाया गया और उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई।

आखिर क्यों हो रहा है विरोध?

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को देश की बड़ी नदी लिंक योजनाओं में गिना जाता है। सरकार का कहना है कि इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और विकास को नई गति मिलेगी। लेकिन दूसरी ओर कई आदिवासी परिवार और ग्रामीण इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

उनका कहना है कि परियोजना से कई गांव प्रभावित होंगे, लोगों को अपनी जमीन और घर छोड़ने पड़ सकते हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे को लेकर अब भी कई सवाल अनसुलझे हैं। इसी मांग को लेकर पिछले दो सप्ताह से धरना और आमरण अनशन जारी था।

अमित भटनागर की बिगड़ी तबीयत

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर पिछले 14 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। लंबे अनशन के कारण उनकी तबीयत लगातार कमजोर होती जा रही थी। रविवार को पुलिस कार्रवाई के दौरान उन्हें मेडिकल टीम की निगरानी में अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

प्रशासन और आंदोलनकारियों के दावे अलग-अलग

प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई केवल लोगों की सुरक्षा के लिए की गई, क्योंकि भारी बारिश के चलते नदी का जलस्तर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा था।

वहीं आंदोलनकारी मानते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर बातचीत करने के बजाय आंदोलन खत्म करवाना चाहती है। उनका कहना है कि जब तक उचित पुनर्वास, पारदर्शी मुआवजा और प्रभावित परिवारों के अधिकार सुनिश्चित नहीं किए जाते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

आगे क्या?

धरना स्थल फिलहाल खाली करा दिया गया है, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत होती है या यह आंदोलन किसी नए रूप में फिर शुरू होता है। केन-बेतवा परियोजना बुंदेलखंड के विकास के लिए अहम मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ जुड़े पुनर्वास और विस्थापन के मुद्दे अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

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