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सुकमा में ‘पादरी नो एंट्री जोन’ घोषित, इंजरम ग्राम सभा का बड़ा फैसला

 

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में धर्मांतरण और बाहरी प्रार्थना सभाओं को लेकर ग्रामीण इलाकों में चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। दरभागुड़ा के बाद अब विकासखंड कोंटा के ग्राम पंचायत इंजरम ने भी ग्राम सभा में सर्वसम्मति से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करते हुए गांव को ‘पादरी नो एंट्री जोन’ घोषित कर दिया है।

ग्राम सभा के इस निर्णय के अनुसार अब गांव में बिना ग्राम सभा की पूर्व अनुमति के कोई भी प्रार्थना सभा, चंगाई सभा या अन्य धार्मिक आयोजन आयोजित नहीं किया जा सकेगा। साथ ही ग्रामीणों ने कथित धर्मांतरण गतिविधियों पर भी रोक लगाने का फैसला लिया है।


ग्राम सभा में सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय

ग्राम सभा के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। बैठक में चर्चा के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि गांव की सामाजिक एकता, परंपराओं और सांस्कृतिक वातावरण को बनाए रखने के लिए बाहरी धार्मिक गतिविधियों पर नियंत्रण आवश्यक है।

ग्राम पंचायत के सरपंच सलवम राजाराम ने बताया कि पिछले कुछ समय से गांव में हो रही कुछ गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में असंतोष था। इसी वजह से सभी ग्रामीणों ने मिलकर यह निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि अब गांव में बिना ग्राम सभा की अनुमति के किसी भी प्रकार की प्रार्थना सभा या चंगाई सभा आयोजित नहीं होगी। उनका कहना है कि गांव की संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और पारंपरिक व्यवस्था को सुरक्षित रखना ग्रामवासियों की प्राथमिकता है।

ग्रामीणों ने लगाए धर्मांतरण के प्रयास के आरोप

ग्रामवासियों का आरोप है कि कुछ बाहरी लोग गांव में पहुंचकर भोले-भाले लोगों को प्रभावित करने और धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रहे थे। इसी आशंका को देखते हुए ग्राम सभा ने यह फैसला लिया।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे फैसले

इससे पहले सुकमा जिले के फंदीगुड़ा और दरभागुड़ा गांवों में भी इसी तरह की ग्राम सभाएं आयोजित की जा चुकी हैं, जहां बाहरी प्रार्थना सभाओं और कथित धर्मांतरण गतिविधियों को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए थे।

इंजरम के इस फैसले के बाद जिले में ऐसे निर्णय लेने वाले गांवों की संख्या बढ़ गई है, जिससे यह मुद्दा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

प्रशासन ने क्या कहा?

प्रशासन ने अपील की है कि ग्राम सभा के सभी निर्णय भारतीय कानून और संवैधानिक प्रावधानों के दायरे में रहकर लागू किए जाएं। साथ ही सभी पक्षों से शांति, सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की भी अपील की गई है।



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