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PM Modi Task Force पर दीपक बैज का बयान , बोले- जनाधार बचाने के लिए बना रही सरकार नई रणनीति

 

रायपुर | 27 जुलाई 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के गठन के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब उस भरोसे को वापस पाने की कोशिश कर रही है, जो परीक्षा विवादों और युवाओं के असंतोष के कारण कमजोर हुआ है।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में पूर्व UIDAI प्रमुख नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि यह समिति परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीक-आधारित और पेपर लीक जैसी घटनाओं से सुरक्षित बनाने के लिए सुझाव देगी।

इसी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक बैज ने कहा कि केवल टास्क फोर्स बना देने से युवाओं का विश्वास वापस नहीं आएगा। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आए विवादों ने लाखों छात्रों के भविष्य पर असर डाला है और युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है।

बैज ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार केवल बाहर से नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर मौजूद लोगों की वजह से पनपता है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण युवा और किसान लगातार आंदोलन करने को मजबूर हुए हैं। उनके अनुसार, सरकार अब जनाधार में आई गिरावट को संभालने के लिए ऐसे कदम उठा रही है।

कांग्रेस नेता ने हाल के छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का युवा वर्ग अब अपने अधिकारों को लेकर पहले से अधिक मुखर है। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नई पीढ़ी केवल प्रचार नहीं बल्कि जवाबदेही की मांग कर रही है।

प्रधानमंत्री द्वारा मंत्रियों को सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय रहने और रील्स जैसे माध्यमों का उपयोग करने की सलाह पर भी दीपक बैज ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि केवल डिजिटल प्रचार से जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार, युवाओं की अपेक्षा रोजगार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़ी है।

हालांकि केंद्र सरकार का पक्ष इससे अलग है। सरकार का कहना है कि नई टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, बेहतर सत्यापन प्रक्रिया और संस्थागत बदलावों पर काम करेगी ताकि भविष्य में पेपर लीक और अनियमितताओं को रोका जा सके।

अब राजनीतिक बहस इस बात पर केंद्रित हो गई है कि क्या यह टास्क फोर्स वास्तव में परीक्षा प्रणाली में ठोस बदलाव ला पाएगी, या विपक्ष के आरोपों के अनुसार यह केवल भरोसा बहाल करने की एक राजनीतिक कोशिश साबित होगी। इसका जवाब आने वाले महीनों में समिति की सिफारिशों और उनके क्रियान्वयन से तय होगा।



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