रायपुर। पद्म विभूषण से सम्मानित और विश्वभर में पंडवानी गायन को नई पहचान दिलाने वाली दिवंगत लोक कलाकार तीजन बाई का ऐतिहासिक तंबूरा अब किसी संग्रहालय का हिस्सा नहीं बनेगा। परिवार ने साफ कर दिया है कि यह तंबूरा उनके घर में ही सुरक्षित रहेगा, क्योंकि यह केवल एक वाद्य यंत्र नहीं बल्कि संघर्ष, साधना और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।
हाल ही में संस्कृति विभाग की एक टीम गनियारी स्थित कौशल्या निवास पहुंची थी। विभाग की ओर से प्रस्ताव रखा गया था कि तीजन बाई के ऐतिहासिक तंबूरे को संग्रहालय में संरक्षित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस धरोहर को करीब से देख सकें। हालांकि परिवार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
परिवार ने क्यों किया इनकार?
तीजन बाई की बहू वेणु देशमुख ने स्पष्ट कहा कि यह तंबूरा परिवार की अमूल्य धरोहर है। इसे संग्रहालय में देने का कोई विचार नहीं है।
उनका कहना है कि इस तंबूरे से केवल संगीत नहीं जुड़ा, बल्कि तीजन बाई का पूरा जीवन, उनका संघर्ष और उनकी कला जुड़ी हुई है। इसलिए इसे उसी घर में रखा जाएगा, जहां से पंडवानी की गूंज वर्षों तक निकलती रही।
पोते सूरज आगे बढ़ा रहे हैं पंडवानी की परंपरा
परिवार ने यह भी बताया कि तीजन बाई के पोते सूरज पंडवानी गायन की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे में यह ऐतिहासिक तंबूरा केवल यादगार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा और अभ्यास का प्रतीक भी है।
परिवार का मानना है कि इस विरासत को घर में सुरक्षित रखना ही तीजन बाई को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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