कांग्रेस नेता छविन्द्र कर्मा ने कहा कि 9 अगस्त को दुनिया भर में विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया, लेकिन इस अवसर पर भाजपा नेताओं और सरकार की ओर से अपेक्षित स्तर पर आदिवासी समाज के लिए बधाई संदेश देखने को नहीं मिले। उन्होंने दावा किया कि सत्ता में आने के बाद भाजपा का आदिवासी संस्कृति और अस्मिता को लेकर रवैया बदल गया है।
“आदिवासी समाज को बांटने की कोशिश”
छविन्द्र कर्मा ने भाजपा सरकार पर आदिवासी समाज को बांटने का आरोप लगाते हुए कहा कि दंतेवाड़ा जिले में तीन स्थानों पर विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने आदिवासी समाज से अपने अधिकारों के लिए एकजुट रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज की पहचान और जीवन का आधार हैं, इसलिए इनकी रक्षा के लिए समाज को एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी होगी।
कांग्रेस नेताओं ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर सहित आदिवासी जननायकों के संघर्ष को भी याद किया। नेताओं ने कहा कि बस्तर सहित छत्तीसगढ़ की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान में आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने भी सरकार को घेरा
जिला कांग्रेस अध्यक्ष शकील अहमद रिज़वी ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस सिर्फ उत्सव का दिन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के ऐतिहासिक योगदान और अधिकारों को याद करने का अवसर है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासी हितों की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी आवाज और अधिकारों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा।
तुलिका कर्मा बोलीं- भाषण नहीं, ठोस कदम जरूरी
जिला पंचायत सदस्य तुलिका कर्मा ने भी भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार में आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व होने के बावजूद आदिवासी संस्कृति और अस्मिता की रक्षा केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सरकार को जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, अस्मिता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को आगे भी उठाती रहेगी।
प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ नेता वीरेंद्र गुप्ता, जिला पंचायत सदस्य सुलोचना कर्मा, मनीष भट्टाचार्य, विवेक देवांगन, मनोज कौरव सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

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