दंतेवाड़ा जिले में पत्रकार रौनक की गिरफ्तारी को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। इस पूरे मामले ने पत्रकार जगत में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। गिरफ्तारी के विरोध में बड़ी संख्या में पत्रकारों ने बस्तर संभाग के कई ज़िलों में एकजुट होकर मौन धरना प्रदर्शन किया और कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर न्यायिक जांच की मांग की।
धरना स्थल पर मौजूद पत्रकारों का कहना था कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का नहीं है, बल्कि यह पत्रकारिता की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सीधा सवाल खड़ा करता है। प्रदर्शन के दौरान पत्रकार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखते नजर आए, लेकिन उनके भीतर इस कार्रवाई को लेकर गहरी नाराजगी साफ दिखाई दी।
पत्रकारों का आरोप है कि गीदम थाना क्षेत्र में हुए सड़क विवाद को बिना पर्याप्त जांच के गंभीर आपराधिक मामला बना दिया। उनका कहना है कि पत्रकार रौनक के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट सहित कई कठोर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया और जल्दबाजी में उनकी गिरफ्तारी भी कर दी गई, जो पूरी तरह एकतरफा कार्रवाई प्रतीत होती है।
मामले की जानकारी के अनुसार, यह घटना एक सड़क विवाद से जुड़ी है। बताया जा रहा है कि एक ट्रैक्टर चालक और स्कूटी सवार के बीच कहासुनी हुई, जो धीरे-धीरे विवाद में बदल गई। इसी दौरान पत्रकार रौनक मौके पर पहुंचे थे। हालात बिगड़ने पर वे भी इस विवाद में शामिल हो गए जिसके बाद उनके व उनके परिवार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।
प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों का कहना है कि पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में निष्पक्षता नहीं दिखाई और बिना सभी पक्षों की बात सुने ही कार्रवाई कर दी। उनका मानना है कि अगर पूरे मामले की सही और निष्पक्ष जांच हो, तो सच्चाई सामने आ सकती है और न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है|
धरना प्रदर्शन के बाद पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक से भी मिला और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि इस मामले में जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



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