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फागुन मड़ई: दंतेवाड़ा की आत्मा और मन का उत्सव

 डॉ. दिनेश कुमार लहरी, सहायक प्राध्यापक मनोविज्ञान शासकीय दंतेश्वरी स्नातकोत्तर महाविद्यालय दंतेवाड़ा  


विगत चार वर्षों से मैंने देखा और समझा कि दंतेवाड़ा की सुप्रसिद्ध फागुन मड़ई केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह बस्तर की संस्कृति की जीवनरेखा है। इसका यहाँ के निवासियों पर गहरा मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रभाव पड़ता है।

​चूँकि आपने 'वैज्ञानिक प्रभाव' और 'मनोवैज्ञानिक प्रभाव'  की बात की है, तो आइए इसे गहराई से समझते हैं:

​मनोवैज्ञानिक प्रभाव 

​यह मड़ई स्थानीय लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक जुड़ाव के लिए एक 'कैथर्सिस' (रेचन) का कार्य करती है:

​सामूहिक पहचान और गौरव : जब हजारों लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा में एकत्रित होते हैं, तो यह उनमें अपनी जड़ों के प्रति गर्व और सुरक्षा की भावना पैदा करता है। यह 'अकेलेपन' को दूर कर 'सामुदायिक शक्ति' का अहसास कराता है।

​तनाव से मुक्ति : बस्तर का जीवन संघर्षपूर्ण रहा है। फागुन मड़ई के दौरान होने वाले नृत्य, संगीत और उत्सव 'डोपामाइन'  और 'एंडोर्फिन' जैसे रसायनों को रिलीज करते हैं, जो मानसिक तनाव और अवसाद को कम करने में सहायक होते हैं।

​आस्था और आत्मविश्वास: माई दंतेश्वरी और स्थानीय देवी-देवताओं (आंगा देव) के प्रति अटूट विश्वास निवासियों को भविष्य की अनिश्चितताओं से लड़ने का मानसिक संबल देता है। 'दैवीय संरक्षण' की यह धारणा उन्हें विपरीत परिस्थितियों में भी शांत रखती है।

​सामाजिक समरसता: मड़ई में ऊंच-नीच और जात-पात का भेद मिट जाता है। सभी ग्रामीण मिलकर रस्मों को निभाते हैं, जिससे सामाजिक घृणा कम होती है और प्रेम बढ़ता है।

​. वैज्ञानिक एवं सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव

​यद्यपि यह एक पारंपरिक उत्सव है, इसके पीछे कुछ तार्किक और व्यावहारिक कारण भी हैं:

# ​पारिस्थितिक जागरूकता : मड़ई का समय फागुन (वसंत) का होता है, जब प्रकृति बदल रही होती है। लोग 'लाटा' (महुआ) और अन्य वनोपजों की पूजा करते हैं, जो वैज्ञानिक रूप से उन्हें प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक बनाता है।

#​आर्थिक चक्र: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो मड़ई एक 'माइक्रो-इकोनॉमी' का केंद्र है। स्थानीय शिल्पकारों और व्यापारियों के लिए यह वर्ष का सबसे बड़ा बाजार होता है, जिससे ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

​शारीरिक सक्रियता: मीलों पैदल चलकर देव-विग्रहों को लाना और पारंपरिक नृत्य करना एक बेहतरीन शारीरिक व्यायाम है, जो निवासियों की सहनशक्ति  को बढ़ाता है।

​फागुन मड़ई दंतेवाड़ा के लोगों के लिए एक "साइकोलॉजिकल बफर" की तरह है। यह उन्हें आधुनिकता के शोर में अपनी पहचान बनाए रखने और जीवन की चुनौतियों को मुस्कुराहट के साथ स्वीकार करने की मानसिक शक्ति प्रदान करता है।


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