रायपुर: छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को दुनिया भर में नई पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का शनिवार देर रात निधन हो गया। उन्होंने रायपुर के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे 70 वर्ष की थीं और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं।
तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज़, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी गायन को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत अंदाज़ में प्रस्तुत करने की उनकी कला ने करोड़ों लोगों का दिल जीता। महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी थी। बताया जाता है कि उन्हें महाभारत सुनाने की प्रेरणा अपने नाना से मिली थी।भारतीय लोककला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश की सांस्कृतिक दुनिया को अपूरणीय क्षति हुई है।
डॉ. तीजन बाई की विरासत आने वाली पीढ़ियों को भारतीय लोककला, संस्कृति और पंडवानी की समृद्ध परंपरा से प्रेरित करती रहेगी। उनकी आवाज़ भले ही अब खामोश हो गई हो, लेकिन उनकी कला हमेशा अमर रहेगी।



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